युद्ध और जंगलों का संबंध
जंगल युद्ध के समय गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। जब देश युद्ध के लिए तैयार होता है, तो उसकी ज़रूरतें भी बदल जाती हैं। लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ जाती है — चाहे वह सैनिकों के लिए शेल्टर बनाने की हो, रेलवे ट्रैक बिछाने की या फिर अन्य सैन्य उपयोग के लिए। इसके चलते हजारों पेड़ काटे जाते हैं, जिससे वन क्षेत्र तेजी से सिकुड़ते हैं।
सिर्फ कटाई ही नहीं, युद्धकाल में विस्फोट और गोलाबारी से भी विशाल जंगल आग की चपेट में आ जाते हैं। एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे जंगल को निगल सकती है। कई बार तो युद्ध इतना विनाशकारी होता है कि आग लगने के बाद वन पुनर्जीवित होने के बजाय बंजर भूमि में बदल जाते हैं।
एक और दुखद सच यह भी है कि कई बार सरकारें खुद अपने जंगलों को नष्ट कर देती हैं। शत्रु के आगे बढ़ने से रोकने के लिए लकड़ी के भंडार और आरा मिलों को जला दिया जाता है। इसे जलती हुई भूमि की नीति भी कहते हैं। यह न सिर्फ
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