रुपया कमजोर कैसे होता है?

डॉलर बनाम रुपया – यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता का संकेतक है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी घटना घटती है – चाहे युद्ध हो, आर्थिक संकट हो या महामारी – निवेशकों के बीच डर फैल जाता है। ऐसे में वे सुरक्षित मुद्रा की तलाश में डॉलर की ओर भागते हैं।

डॉलर की मांग बढ़ना ही रुपये की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण है। ज्यादा डॉलर खरीदने की जरूरत पड़ने पर उसकी कीमत बढ़ जाती है। नतीजतन, रुपये की कीमत गिरती जाती है। मसलन, अगर पहले 1 डॉलर = 75 रुपये था, तो अब वही 83 या 85 रुपये भी हो सकता है।

इसका असर सीधे आम आदमी पर भी पड़ता है। महंगाई बढ़ती है, खासकर तेल और अन्य आयातित सामानों की कीमतों में। घरेलू उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में दिक्कत होती है।

हालांकि, केंद्रीय बैंक (RBI) कभी-कभी डॉलर बेचकर रुपये को स्थिर रखने की कोशिश करता है। लेकिन लंबे समय तक य

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