आधुनिक ओलंपिक के जनक: पियरे डी कूबरतिन

जब भी हम ओलंपिक खेलों की बात करते हैं, एक नाम विशेष रूप से याद आता है—पियरे डी कूबरतिन। उन्हें आधुनिक ओलंपिक खेलों का जनक माना जाता है। इन खेलों के पुनर्जीवन का श्रेय सबसे ज्यादा उन्हीं को जाता है।

80वीं वर्षगांठ पर एक झलक

हाल ही में, पियरे डी कूबरतिन की मृत्यु की 80वीं वर्षगांठ मनाई गई। इस अवसर पर दुनिया भर में उनकी विरासत को याद किया गया। 1894 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) की स्थापना की, जिसने 1896 में एथेंस में पहले आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन किया।

कूबरतिन का मानना था कि खेल मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं में चरित्र, अनुशासन और अंतरराष्ट्रीय सद्भाव की भावना विकसित करने का माध्यम है। उनके सपने और संघर्ष के बाद ही आज हम हर चार साल पर ओलंपिक खेलों का आनंद ले पाते हैं।

उनका यह संदेश आज भी प्रासंगिक है—“महत्वपूर्ण यह नहीं कि जीतो, बल्कि भाग लेना है।” यह कथन न केवल खेल के बल्क

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