भारत के हॉकी महान: ध्यानचंद

ध्यानचं, जिन्हें 'द विजार्ड ऑफ हॉकी' के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय हॉकी के सबसे महान खिलाड़ी माने जाते हैं। उनकी गेंद पर पूर्ण पकड़, चालाकी भरे ड्रिब्लिंग और सटीक गोल स्कोरिंग ने दुनिया भर में उनकी पहचान बनाई। 1928 से 1936 के बीच, उन्होंने भारत को तीन लगातार ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाए – एम्स्टरडम, लॉस एंजिल्स और बर्लिन में।

उनके नाम 1936 के बर्लिन ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ 8 गोल करने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। कहा जाता है कि एक बार तो हिटलर ने उन्हें जर्मनी में रहने और वहां की सेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, लेकिन ध्यानचंद ने भारत के लिए खेलने की प्रतिबद्धता दिखाई।

उनकी जन्मतिथि, 29 अगस्त, अब प्रतिवर्ष राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है, जो उनके योगदान को सम्मान देती है। ध्यानचंद के बिना भारतीय हॉकी का इतिहास अधूरा होता – एक ऐसा नाम जो समय के साथ अमर हो गया।

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