रूस की मदद से भारत की ऐतिहासिक जीत

1971 के तीसरे भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान रूस (तब सोवियत संघ) ने भारत का महत्वपूर्ण समर्थन किया। इस युद्ध की जड़ें पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंसक संघर्ष और लाखों शरणार्थियों के भारत में प्रवेश करने में थीं। जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ी, भारत ने सैन्य हस्तक्षेप की ओर बढ़ना शुरू किया।

इसी बीच, अगस्त 1971 में भारत और सोवियत संघ के बीच मित्रता संधि हुई, जिसने भारत को एक मजबूत राजनीतिक और सैन्य सहयोग प्रदान किया। इस संधि का सबसे बड़ा लाभ यह था कि अमेरिका या चीन की ओर से पाकिस्तान की मदद करने पर रूस ने स्पष्ट संकेत दिए कि वह भारत के साथ खड़ा होगा।

पाकिस्तानी नेतृत्व को जल्द ही एहसास हो गया कि भारतीय सैन्य हस्तक्षेप अब टाला नहीं जा सकता और पूर्वी पाकिस्तान का अलगाव तय है। दिसंबर 1971 में भारत की त्वरित सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तानी सेना को घुटने टिका दिए और बांग्लादेश का जन्म हुआ।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

सत्य, अहिंसा और जन-आंदोलन की वह अभूतपूर्व क्रांति जिसने भारत की सोई हुई आत्मा को झकझोर कर जगा दिया

और पढ़ें →

महात्मा गांधी के वे तीन कालजयी सिद्धांत जिन्होंने पूरी दुनिया की सत्ता संरचना और मानवीय चेतना को जड़ से हिलाकर रख दिया

और पढ़ें →

महात्मा गांधी के वे दो शाश्वत स्तंभ जिन्होंने पूरी दुनिया की नियति और प्रतिरोध की परिभाषा बदल दी

और पढ़ें →

भारत की आत्मा के रक्षक: मोहनदास करमचंद गांधी को हम 'राष्ट्रपिता' के गौरवशाली संबोधन से क्यों नवाजते हैं?

और पढ़ें →

गांधी के वस्त्रों का दर्शन: मात्र एक लंगोटी नहीं, बल्कि साम्राज्यवादी सत्ता के विरुद्ध एक मूक और अडिग क्रांति

और पढ़ें →

संबंधित विषय

टिप्पणियाँ

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।