शून्य की खोज कैसे हुई?

शून्य सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि एक क्रांति थी। आज हम इसे इतना स्वाभाविक मान लेते हैं कि कई बार भूल जाते हैं कि यह भी एक दिन कोई नया विचार था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शून्य का जन्म कहाँ हुआ?

वैज्ञानिकों के अनुसार, शून्य की अवधारणा सबसे पहले प्राचीन मेसोपोटामिया, यानी आधुनिक इराक के क्षेत्र में उभरी। यहाँ के सुमेरियन लिपिकार 4,000 साल पहले संख्या सूचियों में खाली जगह छोड़कर किसी संख्या के अभाव को दर्शाते थे। लेकिन असली कदम उठा बेबीलोन के लोगों ने—उन्होंने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास एक शून्य-जैसे प्रतीक का प्रयोग करना शुरू किया।

हालाँकि, भारत में शून्य को पूर्ण संख्या के रूप में मान्यता मिली। भारतीय गणितज्ञों ने न सिर्फ इसे एक संख्या माना, बल्कि इसके साथ गणना भी की। बाद में अरब और फिर यूरोप तक यह विचार पहुँचा।

तो, शून्य कोई एक व्यक्ति की खोज नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी सोच, अवलोकन औ

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय