पंचायती राज के तीन स्तर

भारत में ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए पंचायती राज प्रणाली लागू की गई है। यह व्यवस्था त्रिस्तरीय है, यानी इसके तीन स्पष्ट स्तर हैं। इनका मुख्य उद्देश्य गाँवों के स्तर पर लोकतंत्र को गहराना और विकास कार्यों में लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

पहला स्तर है ग्राम पंचायत, जो सबसे छोटी इकाई है। यह सीधे ग्राम सभा के माध्यम से गाँव के विकास के लिए जिम्मेदार होती है। दूसरा स्तर है पंचायत समिति, जिसे मंडल परिषद या ब्लॉक समिति भी कहते हैं। यह एक ब्लॉक या कई ग्राम पंचायतों के समन्वय के लिए होती है।

तीसरा और सबसे ऊँचा स्तर है जिला परिषद, जो पूरे जिले के ग्रामीण विकास की योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन की देखरेख करती है।

यह त्रिस्तरीय ढांचा 1992 में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वशासन, पारदर्शिता और विकास को बढ़ावा द

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