भारत की सीमा और रैडक्लिफ रेखा
भारत के बॉर्डर को आम तौर पर रैडक्लिफ लाइन के नाम से जाना जाता है। यह नाम 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच बनी तत्कालीन सीमा के आधार पर पड़ा। जब ब्रिटिश भारत का विभाजन हुआ, तो दोनों देशों के बीच सीमा का निर्धारण करने की जिम्मेदारी ब्रिटिश वकील सर सिरिल रेडक्लिफ को दी गई थी।
रेडक्लिफ की टीम में एक हिंदू और एक मुस्लिम वकील भी शामिल थे, लेकिन रेखा खींचने का अंतिम फैसला रेडक्लिफ ने ही लिया। उनके नाम पर ही यह सीमा रेखा ‘रैडक्लिफ लाइन’ कहलाई। यह रेखा पंजाब और बंगाल के हिस्सों को भारत और पाकिस्तान में बांटती थी।
दुर्भाग्य से, इस रेखा के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा। हिंसा और उथल-पुथल का दौर चला। आज भी यह रेखा भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा है।
17 अगस्त, 1947 को रैडक्लिफ लाइन की आधिकारिक घोषणा की गई थी, हालांकि आजादी की घोषणा 15 अगस्त को हुई थी। इस अ
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