मां का प्यार: एक अनोखा बंधन

हर मां अपने बच्चे से अपार प्यार करती है, लेकिन यह प्यार सिर्फ भावना नहीं, एक गहरा संबंध होता है। बच्चे के जन्म से पहले ही मां उससे जुड़ जाती है – गर्भ में छह महीने के बच्चे की हलचल उसे भावनात्मक रूप से जोड़ देती है। यह प्यार निस्वार्थ होता है, जिसमें कोई शर्त नहीं होती।

पिता भी अपने बच्चे से प्यार करते हैं, लेकिन अक्सर वह उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के संतुलन में दिखता है। मां का प्यार थोड़ा अलग होता है – वह ममता के स्वरूप में होता है। वह बच्चे की छोटी बीमारी से लेकर बड़ी चिंताओं तक को अपने दिल में उतार लेती है। एक लाड़ से लेकर डांट तक, सबके पीछे उसकी ममता छिपी होती है।

यही कारण है कि बच्चे अक्सर पहली रोटी मां के हाथ की याद करते हैं, पहली सुलाम उसकी गोद में होती है और पहला सहारा उसके आँचल में मिलता है। मां का प्यार बच्चे के जीवन की पहली नींव होती है।

फिर चाहे समय कैसा भी हो, मां का प्यार अपरिवर्तित रहता ह

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