मां से मां: एक दर्द भरा संवाद
जेन पिकोला के उपन्यास मां से मां का अंत गहरे भावनात्मक दर्द से भरा है। कहानी दक्षिण अफ्रीका के उस कड़वे यथार्थ पर आधारित है, जहां नस्लीय भेदभाव और सामाजिक असमानता ने पीढ़ियों को तोड़ दिया। उपन्यास की नायिका मंडिसा, एक मां, अपने बेटे एमएक्सओलिसी के जरिए एक दूसरी मां से सीधे संवाद करती है — वह मां जिसके बेटे एमह्लो बिहल की हत्या में उसका बेटा शामिल था।
अंतिम पन्नों में मंडिसा उस दर्द को समझने की कोशिश करती है जो दूसरी मां को सहना पड़ रहा होगा। वह सीधे उसे संबोधित करती है, उसके दुख में शामिल होती है, और साथ ही अपने दिल की भी बात रखती है। वह सोचती है — आगे क्या होगा? क्या सच में कोई उम्मीद है?
फिर वह उसी दिन की कल्पना में लौटती है जब हत्या हुई थी। इस दृश्य में वह न तो एमएक्सओलिसी को बर्बर अपराधी कहती है, न ही बिहल को निर्दोष पीड़ित। बल्कि, वह दोनों को शताब्दियों के उत्पीड़न और नफरत के शिकार बताती ह
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