माँ-बाप का दिल दुखाना कितना भारी पाप है?
माँ का दिल दुखाना किसी पाप से कम नहीं है। जब कोई बेटा या बेटी अपनी माँ को दुखी करता है, तो वह सिर्फ एक भावना नहीं टूटती, बल्कि पूरा परिवार झकझोर देने वाला दर्द होता है। ऐसा माना जाता है कि माँ के आँसू उनकी आत्मा की चीख होते हैं। उन आँसुओं की तपिश इतनी तीखी होती है कि कहते हैं, वह उस माँ की अपनी बेटी के गर्भ में पल रहे बच्चे तक को झुलसा सकती है।
एक पुरानी मान्यता है कि अगर कोई बेटी माँ का दिल तोड़ती है, तो उसके खुद के घर में भी यही दर्द लौटता है। उसके गर्भ में पल रहा बच्चा भी उसी तपिश को महसूस करता है और कभी-कभी यही तपिश गर्भपात का कारण बन जाती है।
क्या माँ-बाप से बड़ा कोई रिश्ता हो सकता है? वे वो हैं जो बिना किसी शर्त के प्यार देते हैं, जो हमारे लिए हर त्याग करने को तैयार रहते हैं। उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। उनके दिल को दुखाना न सिर्फ एक नैतिक गिरावट है, बल्कि
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