गुण ही सच्ची पहचान है

एक बार किसी ने पूछा—गुण नाम से बड़ा होता है, कैसे? इसका जवाब सरल था—नाम से कोई गुणवान नहीं होता। यह बात गहराई तक छू जाती है। आज के समय में हम अक्सर किसी को उसके पद, उपाधि या प्रसिद्धि के आधार पर मापते हैं। लेकिन असली आँकड़ा तो गुणों का होता है।

सोचिए, कोई व्यक्ति चाहे कितना भी बड़ा नाम रख ले, अगर उसमें ईमानदारी, नम्रता, दया और सच्चाई न हो, तो वह नाम सिर्फ एक ध्वनि है। लेकिन जिसमें गुण हैं—चाहे वह कितना भी साधारण नाम क्यों न रखता हो—वह समाज में आदर पाता है।

इतिहास गवाह है। संत, ऋषि, महात्मा—अक्सर उनके नाम भूल गए गए, लेकिन उनके गुण आज भी जीवित हैं। राम का नाम इसलिए याद किया जाता है क्योंकि वे धर्मात्मा थे। कबीर का गाना आज भी गूँजता है क्योंकि उनके शब्द सच्चाई से भरे थे।

नाम तो समय के साथ धुंधला सकता है, लेकिन गुण चिरस्थायी होते हैं। एक गुणी व्यक्ति बिना कुछ कहे भी अपनी उपस्थिति से प्रभ

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