2-3 साल की उम्र: टॉडलर्स का जादुई दौर
2 से 3 साल की उम्र बचपन का वह प्यारा दौर होता है, जब बच्चा अब 'टॉडलर' कहलाने लगता है। ये वो उम्र होती है जब बच्चा चलना-फिरना शुरू कर देता है, छोटी-छोटी बातों पर हंसता है और हर चीज़ को छूकर देखना चाहता है।
इस उम्र में बच्चों की भाषा तेजी से विकसित होती है। वो साधारण वाक्य बनाना शुरू कर देते हैं, नाम सुनकर पहचानते हैं और छोटे निर्देश समझने लगते हैं। माता-पिता अक्सर मुस्कुराते हुए देखते हैं कि उनका बच्चा आज किसी खिलौने का नाम बता रहा है या 'मम्मी' कहकर बुला रहा है।
शारीरिक रूप से भी ये उम्र बहुत एक्टिव होती है। बच्चे दौड़ना, बैठना, छलांग लगाना और छोटे स्टेयर्स चढ़ना सीखते हैं। वो खुद से खाना खाने की कोशिश करते हैं, भले ही थोड़ा गड़बड़ हो जाए।
इस दौरान बच्चे की जिज्ञासा सबसे ज्यादा होती है। वो 'क्यों?' के सवालों से घर भर देते हैं। ये उम्र उनके व्यक्तित्व के निर्माण की नी
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