माता-पिता का सम्मान: जीवन का सबसे बड़ा धर्म
माता-पिता को दुख देने का परिणाम गहरा और दर्दनाक होता है। कथा व्यास आचार्य रजनीश महाराज के शब्दों में, जो व्यक्ति अपने माता-पिता को दुख देता है, वह कभी सच्चा सुख नहीं पा सकता। चाहे वह धन, सम्मान या सुख की कितनी भी कोशिश कर ले, उसके जीवन में एक अशांति हमेशा बनी रहती है।
माता-पिता मनुष्य के सबसे बड़े देवता होते हैं। उनका स्नेह, त्याग और कर्म इतना निस्वार्थ होता है कि जीवन भर उनका ऋण चुकाना लगभग असंभव है। जब कोई उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाता है, तो न सिर्फ व्यक्ति का चरित्र खराब होता है, बल्कि उसके भाग्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। आचार्य रजनीश महाराज कहते हैं कि दुनिया में अच्छे काम करने वाले लोग मरने के बाद भी जिंदा रहते हैं। उनका नाम, उनके कर्म और उनका प्रेम लोगों के दिलों में जीवित रहता है।
इसलिए, माता-पिता का सम्मान करना सिर्फ एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आह्वान है। उनके प्रति सम
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