शक्ति माता: सृष्टि की जीवंत ऊर्जा

शक्ति माता को हिंदू धर्म में ब्रह्मांड की मूल शक्ति माना जाता है। वह वह जीवंत ऊर्जा है जो ईश्वर की आज्ञा से समस्त सृष्टि को चलाती है। शक्ति को केवल एक ताकत नहीं, बल्कि सृष्टि, स्थिति और प्रलय की धुरी माना जाता है।

वह अनंत रूप धारण करने वाली है—कभी माँ के स्नेह से भरी, तो कभी घोर उग्र रूप में प्रकट होकर अधर्म का संहार करने वाली। गीता में भगवान कहते हैं कि यही शक्ति जगतरूप में प्रकट होती है। प्रत्येक प्राणी, हर एक पत्ती, हवा, अग्नि और जल में उसका ही स्पंदन है।

सृष्टि के अंत यानी प्रलय के समय, वह इस सारे जगत को अपने में विलीन कर लेती है। तब वह अव्यक्त रूप में विराजमान रहती है, जैसे सोते हुए ब्रह्मांड में छिपी लौ।

शक्ति माता को देवी, दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती जैसे अनेक नामों और रूपों में पूजा जाता है। हर रूप में वह एक ही है—अनंत सामर्थ्य की अधिष्ठात्री। उनकी पूजा न केवल भक्ति है, बल्कि आत

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