पवित्रीकरण के बाद क्या आता है?

बहुत से लोग पूछते हैं कि पवित्रीकरण के बाद आत्मजीवन में क्या होता है। सच तो यह है कि पवित्रीकरण कोई अंत नहीं, बल्कि एक यात्रा है—एक ऐसी यात्रा जो ईश्वर की महिमा की ओर ले जाती है। हमारे पवित्रीकरण का अंतिम लक्ष्य परमेश्वर की महिमा है, जहाँ हम धीरे-धीरे यीशु के स्वरूप के अनुरूप बनते जाते हैं।

जब हम यीशु में विश्वास करते हैं, तो हमें पहले न्यायाचत होना कहा जाता है—इसका मतलब है कि परमेश्वर हमें पाप से साफ़ मान लेता है। लेकिन इसके बाद आता है पवित्रीकरण का काम। यह वह प्रक्रिया है जिसमें हम दिन-ब-दिन पवित्र बनते जाते हैं। यह कोई एकदम का बदलाव नहीं है, बल्कि एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

यदि आप वास्तव में यीशु में बचाए गए हैं, तो आपका जीवन उसके अनुरूप बदलने लगेगा। आप प्रार्थना करेंगे, पवित्र ग्रंथ पढ़ेंगे, और अपने व्यवहार में बदलाव लाएंगे। न्यायाचत होने के बाद पवित्रीकरण हमेशा आता है—यह उस जीवन का स्वाभाविक परिण

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