गांठ के लिए प्राचीन नुस्खा: क्या है शिला सिंदूर का असर?

गांठ की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है। यह त्वचा के नीचे या मांसपेशियों में हो सकती है और कई बार डरावनी भी लगती है। लेकिन प्राचीन आयुर्वेदिक उपचारों में इसके लिए कुछ प्रभावी नुस्खे बताए गए हैं। उन्हीं में से एक है शिला सिंदूर का उपयोग।

अगर शरीर पर एक से अधिक गांठें दिखाई दे रही हों, तो पारंपरिक ज्ञान के अनुसार 4 ग्राम शिला सिंदूर को 10 ग्राम प्रभाल पिष्टी के साथ मिलाकर मोती और गिलोय के चूर्ण के साथ सात पूड़ियां बना लें। इस मिश्रण को सुबह और शाम खाने के बाद देने की सलाह दी जाती है।

कई वर्षों से चले आ रहे अनुभवों के आधार पर कहा जाता है कि इस उपचार से 99 प्रतिशत तक लाभ देखने को मिलता है। सामान्यतः एक से तीन महीने के भीतर गांठों में सुधार दिखाई देने लगता है।

हालांकि, यह उपचार पारंपरिक है और हर किसी पर एक जैसा असर नहीं हो सकता। इसलिए ऐसे किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले किसी अनुभवी

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