कीमोथेरेपी के दौरान हल्दी का सेवन: सावधानी बरतें

हल्दी लंबे समय से भारतीय रसोई में एक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक मसाले के रूप में उपयोग होती आई है। करक्यूमिन नामक यौगिक के कारण यह सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है। लेकिन जब कीमोथेरेपी या रेडिएशन जैसे गंभीर उपचार चल रहे हों, तो हल्दी के सप्लीमेंट्स या अत्यधिक मात्रा में सेवन से सावधानी बरतनी चाहिए।

कुछ अध्ययनों में संकेत मिला है कि हल्दी कुछ दवाओं के प्रभाव को प्रभावित कर सकती है, खासकर उन दवाओं के साथ जो रक्त को पतला करती हैं या लिवर में एंजाइम्स के कार्य को बदलती हैं। कीमोथेरेपी के दौरान, शरीर पहले से ही संवेदनशील होता है, ऐसे में किसी भी प्रकार का अप्रत्याशित प्रतिकूल प्रभाव गंभीर हो सकता है।

हालाँकि, सामान्य खाने में थोड़ी सी हल्दी का उपयोग जैसे दाल या सब्जी में, अधिकांश मरीजों के लिए हानिकारक नहीं है। लेकिन अगर आप हल्दी के पूरक (सप्लीमेंट्स) लेने के बारे में सोच र

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