कैंसर रोगियों के लिए बुखार क्यों खतरनाक है?
कैंसर के उपचार के दौरान बुखार अक्सर एक गंभीर संकेत हो सकता है। दरअसल, कैंसर और उसके उपचार — खासकर कीमोथेरेपी — शरीर की सफेद रक्त कोशिकाओं पर असर डालते हैं, जो संक्रमण से लड़ने का मुख्य काम करती हैं।
इनमें से एक महत्वपूर्ण कोशिका न्यूट्रोफिल होती है। जब इनकी संख्या बहुत कम हो जाती है, तो इस स्थिति को "सफ़ेद कोशिकाओं की कमी" या न्यूट्रोपेनिया कहा जाता है। ऐसे में शरीर संक्रमण से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।
बुखार अक्सर संक्रमण का पहला संकेत होता है। कैंसर रोगी के लिए यह खतरे की घंटी हो सकती है क्योंकि छोटा सा संक्रमण भी तेजी से बढ़ सकता है और जानलेवा बन सकता है। इसलिए, अगर कैंसर के दौरान कोई रोगी 38°C (100.4°F) से ऊपर का बुखार महसूस करे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी होता है।
इस अवस्था में देरी करना जोखिम भरा हो सकता है। बुखार के साथ कमजोरी, सिरदर्द या ठंड लगना जैसे लक्षण ह
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