गुटखे के नशे में छुपा है जोखिम
रोज गुटखा चबाना सेहत के लिए धीमा जहर है। ज्यादातर लोग इसे मौज-मस्ती का जरिया समझते हैं, लेकिन यह शरीर पर धीरे-धीरे भारी पड़ता है। गुटखा खाने से तंबाकू और हानिकारक रसायन सीधे शरीर में घुलने लगते हैं। इसका पहला असर मुंह पर दिखता है — दांत पीले हो जाते हैं, गम्स (मसूढ़ों) में सूजन आ जाती है और जल्द ही केविटी यानी दांतों का खराब होना शुरू हो जाता है।
सांस लेने पर तीखी बदबू आना सिर्फ एक छोटी समस्या है। असली खतरा छुपा होता है आंतरिक नुकसान में। गुटखे के सेवन से रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे शरीर कमजोर होता है और थकान बनी रहती है।
सबसे भयावह है ओरल कैंसर का खतरा। शोध बताते हैं कि गुटखा खाने वालों में मुंह के कैंसर की संभावना सामान्य व्यक्ति की तुलना में लगभग 50 गुना ज्यादा हो जाती है। यह कैंसर कई बार तब तक पकड़ में नहीं आता जब तक कि उपचार मुश्किल न हो जाए।
गुटखा छोड़न
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