पृथ्वीराaj चौहान की भाषा: ब्रजभाषा या डिंगल?

पृथ्वीराज चौहान, 12वीं शताब्दी के महान राजपूत योद्धा और चित्तौड़ के राजा, अपने साहस और वीरता के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे किस भाषा में बात करते थे? ऐतिहासिक रूप से, उनके दरबार में संस्कृत, प्राकृत और स्थानीय बोलियाँ प्रचलित थीं, लेकिन जिस भाषा में उनकी गाथाएँ गढ़ी गईं, वह है ब्रजभाषा

पृथ्वीराज रासो, जो उनके जीवन पर आधारित प्रसिद्ध महाकाव्य है, मुख्य रूप से ब्रजभाषा में लिखा गया है। यह भाषा उस समय उत्तर भारत में काफी प्रचलित थी। इसके साथ-साथ कुछ राजस्थानी बोलियों के तत्व भी शामिल हैं। कुछ विद्वानों इस शैली को पिंगल कहते हैं, ताकि इसे राजस्थानी कविताओं की प्राचीन भाषा डिंगल से अलग पहचाना जा सके।

हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि पृथ्वीराज रासो के मूल संस्करण और बाद के संस्करणों में अंतर है। समय के साथ इसमें कई जोड़-तोड़ हुए, और भाषा

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