महाराणा प्रताप की सबसे प्रिय रानी: महारानी अजबदे

महाराणा प्रताप के जीवन में महारानी अजबदे का विशेष स्थान था। वे उनकी मुख्य पत्नी और मेवाड़ की महारानी थीं, लेकिन उनका महत्व सिर्फ एक राज्ञी के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे साथी के रूप में था। अजबदे ने हमेशा महाराणा प्रताप के साथ खड़े रहकर वफादारी की मिसाल कायम की।

जब मेवाड़ पर मुगलों का आक्रमण हुआ और महाराणा प्रताप को अपने घर-द्वार छोड़कर अरण्य में जीवन बिताना पड़ा, तब भी अजबदे ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे सादगी से जीवन जीती थीं, लेकिन उनकी बुद्धि और साहसिकता सबके लिए प्रेरणा थी। वनवास के कठिन दौर में भी वे पति के साथ डटी रहीं और राज्य की आशा को जीवित रखा।

कहते हैं कि एक बार महाराणा प्रताप अकेले ही घुड़सवारी कर रहे थे और अजबदे ने उनके लौटने का इंतजार किया। जब वे लौटे, तो उनके घोड़े की लगाम अजबदे ने खुद पकड़ ली। उस पल उनकी भावनाएं और समर्पण साफ झलकते थे।

महारानी अजबदे ने सिर्फ

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