महाराणा प्रताप और अकबर: सच्ची ताकत कौन था?

ताकत केवल सेना और संसाधनों में नहीं होती, बल्कि इरादों में भी होती है। यह बात साफ हो जाती है जब हम अकबर और महाराणा प्रताप की तुलना करते हैं। अकबर के पास विशाल साम्राज्य, लाखों की सेना और अनगिनत संसाधन थे। लेकिन महाराणा प्रताप के पास थी वह अटूट इच्छाशक्ति, जो किसी साम्राज्य से नहीं खरीदी जा सकती।

जब अकबर की 85,000 की सेना ने मेवाड़ पर कब्ज़ा कर लिया, तब महाराणा प्रताप ने आत्मसमर्पण करने के बजाय जंगलों में छिपकर लड़ने का फैसला किया। केवल 20,000 सैनिक, घर बार छोड़ना और राजसी आराम से दूर रहना – सबकुछ सह लिया, लेकिन स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं झुके।

30 साल तक चले इस संघर्ष में, अकबर ने कई बार महाराणा प्रताप को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन कभी सफल नहीं हुआ। इस बात ही बयां करती है कि असली ताकत नंबरों में नहीं, बल्कि सच्चाई और साहस में होती है।

महाराणा प्रताप ने साबित किया कि जब तक आदमी का इरादा अडिग हो, तो कोई भी शक

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