जेल में सोने की अजीब अर्थव्यवस्था
जेल की दीवारों के भीतर जीवन का एक अलग ही नियम चलता है। वहाँ सोने की जगह भी एक लेन-देन बन जाती है। कैदी अगर आराम से सोना चाहते हैं, तो उन्हें बैरकों में बने चबूतरे के लिए पैसे देने पड़ते हैं। यहाँ तक कि चबूतरे के लिए 3 से 8 हजार रुपये तक की ‘बोली’ लग सकती है।
पट्टी और खइया – जेल की भाषा में सुविधाजेल की भाषा में ऊपर का चबूतरा 'पट्टी' और फर्श पर सोने की जगह 'खइया' कहलाती है। पट्टी ज्यादा आरामदायक होती है, इसलिए इसकी कीमत ज्यादा होती है। अगर कोई कैदी ज्यादा पैसा देकर पट्टी खरीद लेता है लेकिन खुद नहीं सोता, तो वह उसे किसी दूसरे कैदी को किराए पर दे देता है।
ये सब सुविधाएँ कैदियों के परिजनों द्वारा जेल के बाहर के किसी दुकानदार को पैसे देकर प्राप्त की जाती हैं। यह पैसा फिर जेल के अंदर तक पहुँच जाता है। ऐसे में जेल की जिंदगी बाहर की तरह ही अमीर-गरीब के आधार पर बंट जाती है।
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