कश्मीर: एक ऐतिहासिक मोड़

1947 के आसपास, जब ब्रिटिश शासन समाप्त हो रहा था, तब कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के सामने एक महत्वपूर्ण फैसला था — क्या वह भारत, पाकिस्तान या स्वतंत्रता चुनेंगे? महाराजा ने शुरू में स्वतंत्र रहने का रास्ता अपनाया। उनका मानना था कि अगर वह भारत में शामिल होते, तो राज्य के अधिकांश मुस्लिम नागरिक नाराज होंगे। दूसरी ओर, पाकिस्तान में विलय का अर्थ होता हिंदू और सिख समुदाय के लिए खतरा, जो राज्य में अल्पसंख्यक थे।

11 अगस्त 1947 को एक महत्वपूर्ण घटना हुई — महाराजा ने अपने प्रधान मंत्री राम चंद्र काक को हटा दिया। काक स्वतंत्र रहने के पक्षधर थे, लेकिन परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही थीं। पाकिस्तान की ओर से बढ़ते दबाव, सैन्य घुसपैठ और आंतरिक उथल-पुथल के बीच महाराजा के लिए निष्पक्ष रहना मुश्किल हो गया।

अंततः, बचाव के लिए मजबूर होकर, महाराजा ने भारत के साथ विलय का फैसला किया। यह फैसला सिर्फ राजनीतिक नहीं, ब

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