बौद्ध धर्म में दीपावली: एक आध्यात्मिक प्रकाश का त्योहार
“अप्पो दीपो भव: अपने आप में दीपक बनो” – यह बुद्ध का हृदयस्पर्शी उपदेश दीपावली के अर्थ को गहराई से समझाता है। जबकि भारत में दीपावली मुख्य रूप से हिंदू धर्म में राम की वापसी के रूप में मनाई जाती है, बौद्ध धर्म में इसका एक अलग आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि उसी दिन बुद्ध ने अपने शिष्यों को ज्ञान, आत्मनिरीक्षण और आंतरिक प्रकाश का संदेश दिया था।
इस दिन बौद्ध मंदिरों और घरों में छोटे-छोटे दीपक जलाए जाते हैं। ये बाहरी रोशनी नहीं, बल्कि अंदर के अज्ञान पर प्रकाश डालने का प्रतीक हैं। लोग स्तूपों पर दीपक स्थापित करते हैं, विशेषकर सारनाथ, सांची और बोधगया जैसे पवित्र स्थलों पर। इस रात में मंदिरों में धर्म सुनाई जाती है, ध्यान किया जाता है और बुद्ध के उपदेशों पर चिंतन किया जाता है।
दीपावली बौद्धों के लिए केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-जागृति का अवसर है। दीपक की लौ उस आंत
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