बौद्ध धर्म में उपासक कौन होता है?
बौद्ध धर्म में पुजारी के लिए कोई एक निश्चित शब्द नहीं है जैसा कि हिंदू या अन्य धर्मों में होता है। यहाँ साधारणतया भिक्षु या बौद्ध मुनि धार्मिक गतिविधियों में मुख्य भूमिका निभाते हैं। लेकिन प्रश्न में उल्लिखित उपासक वह गृहस्थ व्यक्ति होता है जो बौद्ध धर्म का अनुयायी होते हुए भी संन्यासी नहीं होता।
उपासक बुद्ध, धर्म और संघ—इन तीनों की शरण में आता है और पांच आचार-संहिताओं (पंचशील) का पालन करने का व्रत लेता है। ये पांच सिद्धांत हैं—अहिंसा, अस्तेय (चोरी न करना), असंयम से बचना, झूठ न बोलना और मादक पदार्थों का त्याग।
उपासक भिक्षुओं के साथ मिलकर धार्मिक स्थलों में सेवा करता है, दान देता है और सामुदायिक आयोजनों में भाग लेता है। वह धर्म के प्रचार और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस तरह, उपासक बौद्ध समाज की आधारशिला है—न केवल आस्था के स्तर पर, बल्कि आचरण और जीवनशैली में भी। वह धर्म को
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