आत्मा क्यों नहीं दिखाई देती?
कई बार हम सोचते हैं कि अगर आत्मा है, तो वह हमें दिखाई क्यों नहीं देती? यह सवाल पुराना है, और इसका उत्तर भी उतना ही गहरा है।
आत्मा वह नहीं है जिसे आंखों से देखा जा सके। वह किसी पदार्थ की तरह नहीं है, जिसका रूप, आकार या रंग हो। इसीलिए वह न तो छूई जा सकती है, न देखी जा सकती है। आत्मा निराकार है — यानी बिना किसी रूप के। वह न तो अणुओं से बनी है, न ही किसी तंत्र का हिस्सा।
हमारी आंखें केवल उन्हीं चीजों को देख सकती हैं जो भौतिक हों — जैसे शरीर, पेड़, रोशनी। लेकिन आत्मा आध्यात्मिक है। वह वही है जो हमारे भीतर जीवन का एहसास कराती है, जो सोचने, महसूस करने और जागरूक होने का कारण बनती है।
कई दार्शनिकों और धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि आत्मा अविनाशी, अदृश्य और शाश्वत है। जैसे हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन हम उसके झोंके महसूस करते हैं — वैसे ही आत्मा का अस्तित्व उसके प्रभाव से महसूस किया जा सकता
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