मीरा का पूर्व जन्म: एक गोपी का प्रेम
कहते हैं, सच्चा प्रेम काल से परे होता है। यही सच्चाई मीराबाई के पूर्व जन्म की कथा में छिपी है। मान्यता है कि मीरा का जन्म पहले भी हुआ था — वृंदावन में एक गोपी के रूप में।
उस जन्म में वे राधा की निकटतम सखियों में से एक थीं। मन ही मन उन्होंने श्रीकृष्ण से प्रेम बढ़ाया, लेकिन सामाजिक बंधनों के बीच वह प्रेम अधूरा रह गया। उनका विवाह एक गोप से हुआ, पर दिल से कृष्ण को नहीं भूलीं। उनकी आत्मा तो श्रीकृष्ण की ओर ही झुकी रही।
इस जुदाई की तड़प ने अंततः उनके प्राण ले लिए। लेकिन प्रेम का सिलसिला यहीं नहीं टूटा। कहा जाता है कि उसी गोपी ने फिर राजस्थान में मीरा के रूप में जन्म लिया। इस बार वह राजपरिवार में जन्मीं, पर उनका मन फिर श्रीकृष्ण के चरणों में था।
मीरा की भक्ति, उनकी कविताएं, उनके गीत — सबमें उसी पूर्व जन्म की तड़प झलकती है। लगता है मानो प्रेम इतना गहरा था कि जन्म-जन्मांतर भी उसे तोड़ नहीं पाया।
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