मृत्यु के डर से कैसे मुक्ति पाएं?

मृत्यु—यह शब्द सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। लेकिन क्या इसका डर वाकई आना चाहिए? प्राचीन यूनानी दार्शनिक एपिकुरस कहते हैं कि मृत्यु का भय हमारे जीवन की सबसे बड़ी बाधा है। यह डर न सिर्फ हमारे विचारों में घर कर लेता है, बल्कि हमारे आनंद, संबंध और जीने के तरीके को भी प्रभावित करता है।

एपिकुरस के अनुसार, मृत्यु का डर इतना गहरा है कि यह हमें वर्तमान में जीने से रोकता है। हम कई बार भविष्य के डर में जिंदा रहते हैं—बचत करते हुए, डरते हुए, टालते हुए—लेकिन जीते हुए नहीं। वे मानते हैं कि अगर हम खुशी से जीना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले मौत के भय से आत्मनिर्भर होना होगा

उनका दृष्टिकोण सरल है: जब तक हम जीवित हैं, मृत्यु मौजूद नहीं होती। और जब मृत्यु आ जाती है, तब हम मौजूद नहीं होते। तो फिर उसका डर क्यों? यह सोच नहीं बदल देती कि मृत्यु क्या है, लेकिन यह जरूर बदल सकती है कि हम जीवन

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