मृत्यु के लक्षण: एक दृष्टि में
मृत्यु, प्राणों का अंत होने के साथ आनुवंशिक रूप से जुड़े कई शारीरिक परिवर्तनों को जन्म देती है। इन लक्षणों को समझना न केवल चिकित्सीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मृत्यु की प्रक्रिया को समझने में भी मदद करता है।
सबसे स्पष्ट संकेत है श्वास का बंद हो जाना। जब फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं, तो ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। इसके साथ ही चयापचय की प्रक्रिया भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। नाड़ी गायब हो जाती है क्योंकि हृदय धड़कना बंद कर देता है।
मृत्यु के बाद शरीर में कई भौतिक परिवर्तन देखे जाते हैं। पीलापन क्षण (पालर इन डेथ) वह समय होता है जब त्वचा पीली पड़ने लगती है। यह मृत्यु के 15 से 120 मिनट के भीतर दिखाई देता है। इसके बाद लिवर मोर्टिस (लिवोर मोर्टिस) होता है, जिसमें रक्त गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर के निचले हिस्सों में जमा हो जाता है और त्वचा पर गहरे धब्बे दिखाई देते ह
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