वाराणसी में लाश जलाने का काम कौन करता है?
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इसके तहत शव को जलाया जाता है, जिसे चिता जलाना भी कहते हैं। खासकर वाराणसी में यह परंपरा बहुत पुरानी और पवित्र मानी जाती है।
लेकिन यह काम हर कोई नहीं कर सकता। यहां डोम समुदाय के पुरुष ही इस काम को संभालते हैं। वे ही मृतक की संतान के हाथ में मुखाग्नि (आग) देते हैं और चिता जलाने की पूरी व्यवस्था देखते हैं।
यह परंपरा कई शताब्दियों पुरानी है। डोम समुदाय देश भर में पाया जाता है, लेकिन वाराणसी में उनकी भूमिका खास रही है। वे न केवल शवदाह का काम करते हैं, बल्कि अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य रस्मों में भी सहायता करते हैं।
हालांकि समय बदल रहा है, लेकिन आज भी वाराणसी के घाटों पर डोम ही चिता की आग जलाते हैं। उनका यह काम सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि धार्मिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।
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