चेतक कहाँ रहता था?
चेतक, महाराणा प्रताप का वह प्रसिद्ध घोड़ा, जिसकी वीरता आज भी इतिहास के पन्नों में जीवित है, वह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में रहता था।
इतिहासकारों के अनुसार, एक बार एक चारण व्यापारी काठियावाड़ से तीन घोड़ों को लेकर आया था। उन घोड़ों के नाम थे—चेतक, त्राटक और अटक। त्राटक का उपयोग दूसरे काम में हो गया, जबकि अटक को महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्ति सिंह ने अपने पास रख लिया। लेकिन चेतक को महाराणा प्रताप स्वयं ने चुना था।
चेतक न सिर्फ़ एक साधारण घोड़ा था, बल्कि एक वफादार साथी था। वह घोड़ा जिसने हल्दीघाट के युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ अपनी जान जोखिम में डाली। उसकी तेज़ धार, बलशाली कद-काठी और अदम्य साहस ने इतिहास में अपना अलग स्थान बनाया।
कहा जाता है कि चेतक ने युद्ध के मैदान में एक चट्टान पर कूदकर इतिहास रच दिया था। आज भी उसकी मूर्ति चित्तौड़गढ़ के पास खड़ी है, मानो वीरता की गाथा सुना रही हो
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