चेतक: आसमान का घोड़ा
महाराणा प्रताप के वीरता के इतिहास में चेतक का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। यह कोई साधारण घोड़ा नहीं था, बल्कि एक ऐसा साथी था, जिसने वफादारी और बलिदान की नई परिभाषा लिख दी।
हल्दीघाटी के मैदान में जब भारी संख्या में मुगल सेना ने घेर लिया था, तब चेतक ने अपने स्वामी के लिए जान की बाजी लगा दी। वह न तो बाज था, न खगराज, पर ऐसी गति से दौड़ता था मानो आसमान में उड़ रहा हो। उसकी छलांगें इतनी ऊँची थीं कि लोगों ने उसे "आसमान का घोड़ा" कहना शुरू कर दिया।एक ऐसा पल आया जब चेतक ने गंभीर चोट के बावजूद महाराणा को बचाने के लिए लाल नाले वाले पहाड़ी ऊपर छलांग लगा दी। वह जान गया था कि यह उसकी आखिरी छलांग है, पर फिर भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
चेतक की स्वामीभक्ति इतनी गहरी थी कि आज भी लोग उसे भारत के सर्वश्रेष्ठ घुड़सवार घोड़े के रूप में याद करते हैं। वह सिर्फ एक युद्धघोड़ा नहीं, बल्कि एक वीर कथा बन गया।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।