सिरोही की प्रसिद्ध तलवार: एक कला का जीता-जागता इतिहास
महेंद्र लोहार, सिरोही के एक पारंपरिक कारीगर, तलवार बनाने की कला में इतने माहिर हैं कि उनके हाथों से बनी हर तलवार सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि इतिहास की झलक होती है। वे बताते हैं कि एक सिरोही तलवार आमतौर पर 30 से 32 इंच लंबी होती है और इसे बनाने के लिए लगभग एक किलो लोहे की जरूरत पड़ती है।
लेकिन तैयार तलवार का वजन कम हो जाता है — 800 से 900 ग्राम तक। इसकी वजह है भट्टी में लोहे को तपाने की प्रक्रिया। गर्मी में लोहा मुलायम हो जाता है, फिर धीरे-धीरे हथौड़ों से आकार देकर इसे तलवार का रूप दिया जाता है। यह काम सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि दिल और जुनून से किया जाने वाला श्रम है।
महेंद्र का कहना है कि हर तलवार अनोखी होती है — उसकी धार, उसका वजन, उसका संतुलन। यह सिर्फ हथियार नहीं, एक शिल्पकार की मेहनत और सदियों पुरानी परंपरा की गवाही भी है। आज भी जब कोई सिरोही तलवार निकलती है, तो लगता है कि
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