वास्को डिगामा और भारत की खोज

भारत की खोज का श्रेय पुर्तगाली नाविक वास्को डिगामा को जाता है। वे पहले यूरोपीय थे जिन्होंने सीधे समुद्री मार्ग से अफ्रीका के हिरासंदर के चारों ओर नाव चलाकर भारत की यात्रा की। उन्होंने 20 मई, 1498 को भारत के केरल के कोचीन (कोच्ची) बंदरगाह पर पहुँचकर इतिहास रच दिया।

इससे पहले भारत से मसाले, रेशम और जड़ी-बूटियों की मांग यूरोप में बहुत थी, लेकिन इन वस्तुओं की आपूर्ति पारंपरिक भूमि मार्गों से होती थी, जो लंबे और खतरनाक थे। वास्को डिगामा के इस सफल समुद्री संगम ने पुर्तगाल के लिए एक नए व्यापार युग की शुरुआत की।

हालाँकि, यह कहना सही नहीं होगा कि वास्को डिगामा ने "भारत की खोज" की, क्योंकि भारत तब से एक समृद्ध और विकसित सभ्यता के रूप में जाना जाता था। चीन, अरब और यूनानी स्रोतों में भारत का उल्लेख हजारों सालों से मिलता है। लेकिन वास्को डिगामा वे थे जिन्होंने यूरोपीय दुनिया को सीधे भारत से जोड़ने वाला समु

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