चंद्र और रोहिणी की प्रेम कथा
क्या आपने कभी सोचा है कि चांद की पत्नी कौन है? आकाश में चमकते चंद्रमा के बारे में हिंदू पौराणिक कथाओं में एक सुंदर कहानी प्रचलित है। प्रजापति दक्ष, जो ब्रह्मा के पुत्र थे, की तेईस पुत्रियां थीं। इन सभी का विवाह चंद्रदेव से हुआ था।
हालांकि, चंद्रमा का प्यार सबमें से एक विशेष नाम रोहिणी के प्रति अधिक था। वे उनके साथ इतना समय बिताते कि अन्य 26 पत्नियां उपेक्षित महसूस करने लगीं। यह असमान प्रेम उनकी मां वीरणी और प्रजापति दक्ष को नाराज कर गया।
दक्ष ने चंद्रमा पर श्राप डाल दिया – “तुम घटने-बढ़ने लगोगे।”इसी श्राप के कारण चंद्रमा एक माह में पूर्ण होता है, और फिर धीरे-धीरे घटने लगता है। कहा जाता है कि यह चंद्रमा के हीनता और पूर्णता का चक्र ही चांद्र मास का आधार है।
इस कथा में प्रेम के साथ जिम्मेदारी और संतुलन का संदेश भी छिपा है। रोहिणी आज भी ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण नक्षत्र के रूप में जानी जाती हैं। शायद इसीलिए कहा जाता है – “चंद्र
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