चंद्रमा की देवी: प्राचीन मान्यताएं और देवियां

प्राचीन समय से मनुष्य चंद्रमा के प्रति आकर्षित रहे हैं। विभिन्न संस्कृतियों में चंद्रमा को दैवीय शक्ति माना गया और उसकी उपासना अलग-अलग देवियों के रूप में की जाती थी। रोमन पौराणिक कथाओं में, लूना आकाश में चंद्रमा की देवी मानी जाती थीं। वे पूर्णिमा की प्रतीक थीं, जैसे कि ग्रीक पौराणिक कथाओं में सेलीन।

लेकिन चंद्रमा की उपासना सिर्फ आकाश तक ही सीमित नहीं थी। डायना, जो पृथ्वी पर चंद्रमा की देवी मानी जाती थीं, वन और वन्यजीवों की रक्षक भी थीं। वे अर्धचंद्र के प्रतीक के रूप में जानी जाती थीं — ग्रीक परंपरा में उनके समकक्ष आर्टेमिस को जाना जाता है।

इसके अलावा, अंधेरे चंद्रमा यानी अमावस्या की रातों से जुड़ी थीं हेकेट। वे अंडरवर्ल्ड (परलोक) की देवी थीं और रहस्यमयी शक्तियों से जुड़ी मानी जाती थीं। उन्हें जादू, रात और अंधेरे का संरक्षण माना जाता था।

इन तीन देवियों — लूना, डाय

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