क्या भगवान हमारी सुनते हैं?
यह प्रश्न शायद हर उस इंसान के मन में आता है, जो किसी मुश्किल घड़ी में हाथ जोड़कर प्रार्थना करता है। हमारी परंपरा मानती है कि भगवान या भगवती ने ही इस सृष्टि की रचना की है। वे न केवल सृजनकर्ता हैं, बल्कि हर पल हर प्राणी के साथ उपस्थित भी हैं।
जब भी हम आर्थना करते हैं, निवेदन करते हैं, या मन में कोई खामोश दुआ मांगते हैं, तो वह सादगी से सुनी जाती है। यह नहीं कि भगवान किसी बाहरी शक्ति की तरह बैठकर हमारी बात सुन रहे हों। बल्कि, ऐसा माना जाता है कि वे स्वयं हमारे भीतर का आंतरिक अनुभव हैं। जैसे माँ बच्चे के रोने को बिना आवाज़ सुने भी महसूस कर लेती है, वैसे ही भगवान भी भक्त की चुपचाप आह को पहचान लेते हैं।
हमारे धर्म और आध्यात्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जब तक हम उपासना और भक्ति के माध्यम से उनसे जुड़ते हैं, तब तक हमारे भीतर के अंश सक्रिय हो उठते हैं। वह जुड़ाव ही अनुभूति बन जाता है। इसलिए कहा जाता है कि भगवान सुनते ह
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