रात का भगवान कौन है?
कई लोग रात को सिर्फ अंधकार का समय मानते हैं, लेकिन प्राचीन काल में रात्रि को एक दिव्य शक्ति माना गया है। कहा जाता है कि इसी रहस्यमयी रात्रि में भगवान शंकर ने रुद्र के रूप में अवतरण किया था।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सृष्टि के उद्भव के समय सबसे पहले भगवान विष्णु से ब्रह्मा का जन्म हुआ। फिर ब्रह्मा ने अपने क्रोध और तप से रुद्र को जन्म दिया। यह रुद्र ही बाद में भगवान शिव के रूप में पूजे जाने लगे। इस प्रकार रात्रि न सिर्फ नींद या विश्राम का समय है, बल्कि शक्ति, तप और रहस्य का भी प्रतीक है।
पुराणों में रात्रि को एक देवी के रूप में भी वर्णित किया गया है। रात्रि उस गहन अवस्था को दर्शाती है जहां से नई ऊर्जा, नई शुरुआत और नई दिव्यता का उदय होता है। इसीलिए कहा जाता है कि जब रात ढलती है, तो देवता ध्यान में डूबे शिव को सलाम करते हैं।
आज भी कई आध्यात्मिक परंपराओं में निशितार्पण के दौरान रात्रि को पूजा जाता है। इसे
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