शादी में आने वाली बाधाओं के कारण
कई बार जीवन में विवाह के मामले में अनचाही देरी या बाधाएं आ जाती हैं। हालांकि प्रेम, उम्र और इच्छा सभी जगह मौजूद होती हैं, फिर भी शादी न होना कई लोगों को परेशान करता है। ज्योतिष के अनुसार ऐसी समस्याओं के पीछे ग्रहों की स्थिति का बहुत बड़ा योगदान होता है।
लग्न (प्रथम भाव), सप्तम भाव और बारहवें भाव में गुरु या किसी शुभ ग्रह का न होना शादी में रुकावट का मुख्य कारण हो सकता है। इसके अलावा अगर चंद्रमा कमजोर हो — खासकर जब वह कर्क राशि में होकर भी प्रभावहीन लगे — तो भावनात्मक उथल-पुथल और विवाह में देरी हो सकती है।
सप्तम भाव, जो विवाह का प्रतिनिधित्व करता है, अगर उसमें शनि या गुरु की दृष्टि हो, तो शादी टल सकती है। कई बार यह देरी इतनी लंबी हो जाती है कि लोग निराश हो जाते हैं। गुरु की कर्क राशि पर सप्तम से दृष्टि होने पर भी विवाह में बाधाएं आ सकती हैं, क्योंकि यह राशि चंद्रमा की है और भावनाओं से जुड़ी है।
हालांकि
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