गलती से सीखना: एक कला
हर कोई कभी न कभी गलती करता है। यह मानवीय है। लेकिन असली सवाल यह नहीं कि गलती हुई या नहीं, बल्कि यह है कि गलती के बाद आप क्या करते हैं। कई लोग पहले दूसरों को दोष देने लगते हैं, मानो खुद की जगह किसी और को झटका देकर सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन दूसरों पर इल्ज़ाम डालना न तो समाधान है और न ही सम्मान की बात।
माफ़ी मांगने में संकोच मत करें। एक छोटा सा "माफ़ करना" कई बार रिश्तों में दरार भरने से बचा लेता है। गलती स्वीकार करना कमज़ोरी नहीं, बल्कि साहस की निशानी है।
कई बार गलती के बाद नाकारात्मक विचार दिमाग में घर कर लेते हैं—शर्म, डर, आत्म-संदेह। लेकिन इन विचारों को पनपने न दें। जैसे ही ये ख्याल आएं, उन्हें पहचानें और त्याग दें। खुद को बर्बाद करने के बजाय, गलती को सीखने का अवसर मानें।
कई बार लोग गलती को छिपाने के चक्कर में और बड़ी गलती कर बैठते हैं। शर्म के मारे सच छिपाने की बजाय, सामने आइए। सच बोलने में ही ताकत है।
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