बड़ों के पैर क्यों छूते हैं? जानिए इस परंपरा का महत्व
हिंदू संस्कृति में छोटे-बड़े का अंतर उम्र के साथ-साथ आदर का भी प्रतीक है। इसी कड़ी में, बड़ों के पैर छूना एक गहरी परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। इसे चरण स्पर्श भी कहा जाता है और यह केवल एक रीति नहीं, बल्कि आत्मिक आदर का प्रतीक माना जाता है।
जब कोई छोटा बच्चा या युवा अपने माता-पिता, दादा-दादी या किसी बुजुर्ग के पैर छूता है, तो यह उनके प्रति विनम्रता और प्रेम दिखाता है। इस प्रथा के पीछे यह मान्यता है कि बड़ों के पैरों में उनका अनुभव, ज्ञान और आशीर्वाद समाया होता है। जब छोटे उनके पैर छूते हैं, तो वे उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं।
इस प्रथा की जड़ें वैदिक काल तक जाती हैं। तब से लेकर आज तक, यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रही है। कई परिवारों में तो त्योहारों या विशेष अवसरों पर यह जरूरी माना जाता है।
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