कश्मीरी पंडितों के खिलाफ नरसंहार: एक दर्दनाक अध्याय

1990 के दशक में कश्मीर घाटी में उग्रवाद के दौर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई कई बर्बर हत्याएँ भारत के इतिहास में एक काले दाग की तरह हैं। ये हमले न सिर्फ जानिबरदार थे, बल्कि जाति और धर्म के आधार पर चुने गए थे। ऐसे कई मामले हैं जो आज भी दिल को दहला देते हैं।

डोडा नरसंहार (14 अगस्त, 1993): इस दिन आतंकवादियों ने एक सार्वजनिक बस को रोककर उसमें सफर कर रहे 15 हिंदू यात्रियों की निर्ममता से हत्या कर दी। ये सभी कश्मीरी पंडित थे, जो अपने घरों से दूर थे। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आतंक फैला दिय inflammations।

संग्रामपुर नरसंहार (21 मार्च, 1997): आतंकियों ने एक शांत गाँव में घर में घुसकर सात कश्मीरी पंडित परिवार के सदस्यों को अगवा किया और बाद में उनकी हत्या कर दी। यह हमला स्पष्ट रूप से सांप्रदायिक नफरत पर आधारित था।

वंधामा नरसंहार (25 जनवरी, 1998): इस सबसे भयानक घटनाओं में से एक थी। हथियारबंद

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