क्या बौद्ध शराब पीते हैं?

बौद्ध धर्म के बारे में एक अक्सर पूछे जाने वाला सवाल यह है कि क्या बौद्ध शराब पी सकते हैं? जवाब सीधा है—आम तौर पर नहीं। हालांकि दुनिया भर में बौद्ध परंपराएं काफी विविधतापूर्ण हैं, लेकिन शराब के सेवन को लेकर इनका रवैया काफी स्पष्ट रहा है।

गौतम बुद्ध ने स्पष्ट रूप से पाँच नियमों में से एक के रूप में शराब और नशीली चीजों के सेवन से बचने की सलाह दी थी। इसे 'मदिरामत्स्य' या नशीली वस्तुओं का त्याग कहा गया है। इसका मकसद स्पष्ट है—मन की स्थिरता और सजगता बनाए रखना। शराब पीने से मन भ्रमित हो जाता है, जो ध्यान और आत्म-जागरूकता के रास्ते में बाधक है।

भिक्षु और भिक्षुणियों के लिए तो यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन भक्तों या आम बौद्ध अनुयायियों के लिए भी इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है। कुछ सांस्कृतिक उत्सवों में कहीं-कहीं हल्के शराबी पेयों का उपयोग देखा गया है, लेकिन यह अपवाद है, नियम नहीं।

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