राधा जी की मृत्यu कैसे हुई?

भगवान कृष्ण और राधा जी का प्रेम अकथनीय और अनूठा माना जाता है। शास्त्रों और कथाओं में कहीं भी राधा जी की मृत्यु का स्पष्ट वर्णन नहीं मिलता। वैसे तो मृत्यु संसार का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन राधा जी के लिए यह अलग है।

राधा कृष्ण के प्रेम में इतनी विलीन हो गईं कि उनकी अलग से कोई अस्तित्व की बात नहीं रह जाती।

कहते हैं, जब कृष्ण मथुरा चले गए, तब राधा जी का हृदय विछोड़ से भर उठा। लेकिन उन्होंने शारीरिक मृत्यु नहीं पाई, बल्कि अपने प्रेम के माध्यम से कृष्ण में ही समा गईं। गीत गोविंद और ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे ग्रंथों में इसी भाव को दर्शाया गया है—राधा का प्राण कृष्ण के हृदय में समा जाता है।

इसलिए, राधा जी की मृत्यु नहीं हुई—बल्कि उनकी लीला कृष्ण के हृदय में विलीन होकर अमर हो गई। वे न तो मरीं, न ही अलग रहीं। उनका प्रेम आज भी भक्तों के बीच जीवित है।

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