महाकाल के संतान: पार्वती की अद्भुत रचना

भगवान शिव, जिन्हें महाकाल भी कहा जाता है, और माता पार्वती की तीन संतानें हैं। इनमें सबसे बड़े हैं कार्तिकेय, फिर गणेश और तीसरी हैं अशोक सुंदरी।

कार्तिकेय, जो युद्ध के देवता माने जाते हैं, सूर्य की किरणों से जन्मे कथा के अनुसार। उन्हें षष्ठी के रूप में भी पूजा जाता है। गणेश, जो बाधाओं के हर्ता माने जाते हैं, माता पार्वती की अपनी त्वचा से रची हुई मूर्ति से जन्मे थे। मान्यता है कि उनका सिर हाथी का होना एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक दिव्य योजना थी।

लेकिन कम लोग जानते हैं कि माता पार्वती ने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक पुत्री की रचना भी की थी। उस दिव्य कन्या का नाम था अशोक सुंदरी। कहानियों के अनुसार, पार्वती जब शिव के बिना उदास रहती थीं, तो उन्होंने अपनी ही छाया या शरीर से इस कन्या की रचना की। अशोक सुंदरी का नाम इसीलिए पड़ा क्योंकि उनके जन्म के बाद माता का शोक समाप्त हो गया।

ये तीनों संत

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