रुक्मिणी की मृत्यु: एक विलापनीय प्रेम कहानी

रुक्मिणी, भगवान श्रीकृष्ण की प्रमुख पत्नी और वृष्टि वंश की राजकुमारी, अपने पति के प्रति अटूट प्रेम और निष्ठा के लिए जानी जाती हैं। उनकी मृत्यु की कथा महाभारत के मौसल पर्व में वर्णित है, जो कृष्ण के समय का अंतिम पर्व है।

यदु वंश के आपसी संहार के बाद, जिसे यादव नरसंहार कहा जाता है, भगवान कृष्ण धरती पर अपने अंतिम कार्य पूरे कर चुके थे। उनके गायब होने के बाद, द्वारका में शोक का माहौल छा गया। इसी समय, रुक्मिणी ने अपने पति के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं माना।

प्राचीन परंपराओं के अनुसार, कई सतियों की तरह, रुक्मिणी ने भी अपने पति के जाने पर स्वयं को अंतिम संस्कार की चिता में त्याग दिया। जांबवती के साथ मिलकर उन्होंने आत्मदाह किया, जिसे इतिहास में एक गहरे भावनात्मक त्याग के रूप में याद किया जाता है।

रुक्मिणी की मृत्यु केवल एक अंत नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और त्याग की पराकाष्ठा का प्रत

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