राधा का अंतिम संगम
राधा और कृष्ण का प्रेम मात्र एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि आत्मा के दैवीय से जुड़ने का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा की मृत्यु का कोई निश्चित तिथि नहीं दी गई, परंतु उनका अंतिम क्षण बेहद भावपूर्ण था।
जब राधा अपने अंतिम समय में थीं, तो कृष्ण ने बांसुरी बजाना शुरू किया। वह सुरीली धुन न केवल वृंदावन की वायु में गूंजी, बल्कि राधा की आत्मा को अपने निर्वाण की ओर ले गई। आँखें बंद करते ही उन्होंने शरीर छोड़ दिया – बांसुरी की आवाज़ में ही।
कृष्ण जानते थे कि राधा की आत्मा कभी उनसे नहीं अलग हुई। उनका प्रेम अमर है, समय से परे। फिर भी, उस क्षण कृष्ण भी टूट गए। राधा के वियोग में उनका हृदय बैठ गया। वह केवल एक मृत्यु नहीं थी – यह आत्मिक मिलन की एक अद्भुत अभिव्यक्ति थी।
राधा की मृत्यु कोई अंत नहीं, बल्कि एक निर्वाण का क्षण था, जब वह सांसारिक रूप से लौटकर अपने प्रिय कृष्ण में विलीन हो गईं। आज
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