रुक्मिणी देवी अरुंडेल: एक स्मृति
रुक्मिणी देवी अरुंडेल, भारत की महान नृत्यांगनाओं में से एक, का निधन 24 फ़रवरी, 1986 को हुआ था। वे 29 फ़रवरी, 1904 को तमिलनाडु में जन्मीं थीं और अपने समर्पित जीवन के माध्यम से भारतीय संस्कृति और कला को नया आयाम दिया।
उन्होंने कुछ साल पहले तक भरतनाट्यम नृत्य को केवल मंदिरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन रुक्मिणी देवी ने इसे मंचों पर लाकर एक नए सम्मान के साथ स्थापित किया। उनके प्रयासों से भरतनाट्यम न केवल पुनर्जीवित हुआ, बल्कि दुनिया भर में भारतीय कला का प्रतीक बन गया।
1936 में, उन्होंने कलाक्षेत्र की स्थापना की, जो आज भी नृत्य, संगीत और कला के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। वे सिर्फ एक नृत्यांगना नहीं थीं, बल्कि शिक्षाविद्, समाज सुधारक और पशुओं के अधिकारों की हिमायती भी थीं।
उनके जीवन की लंबी और प्रेरणादायक यात्रा ने कला को आध्यात्मिकता और समर्पण का दर्पण बनाया। 24 फ़रवरी, 1986 को उनके
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